Tue, 13 Nov 2018
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मिथिलाञ्चलक प्रमुख पर्यटकीय स्थल

पौष २७, २०७३

-डा. राम दयाल

Sir George Grierson क शब्दमे मिथिला :–
'This. Geographycally, 'Mithila Is bound on the North and South by the Himalayas and the Ganges, and on the East and west by Koshi and Gandki respectively.'

मिथिलाञ्चलक प्राचीन सीमाक बारेमे बृहद् विष्णु पुराण मे एहि प्रकारक उल्लेख पबैछ ः–

कौशिकी तु समारम्य गण्डकी मधिगम्यवै
योजनानी चुतर्विशतं: व्यायाम : परिर्कीिर्तत :।।१२।।
गंगा प्रवाहमारम्य यावाद् हैमवतं वन्र
विस्तार षोडश : प्रोक्रो देशस्य कुलनन्दना
मिथिला नाम नगरी नामस्ते लोक विश्रृता ।
पंचामि : कारणै पुष्या विख्याता जगतीत्रये ।
वृहद् पुराणे मिथिला महात्म्ये
द्धितीयोध्याय ।।

प्राचीन मिथिला राज्यक सीमा पूर्वमे कोशी पश्चिममे गंडकी (नारायणी) आ उत्तरमे हिमालय अर्थात् महाभारतक वन धरि छैक से उल्लेख पाउल जायछ त दक्षिणी सीमा गंगा कहल गेल छैक ।
मिथिला के तिरभुक्ति (तिरहुत) सेहो कहला जाइत छलैक तिरभुक्ति (तिरहुत) राज्यक सीमा पूर्वमे कोशी पश्चिममे गंडकी तथा दक्षिणमे गंगाा आ उत्तरमे हिमालयक पर्वत श्रृखला धरि फैलल रहैक ।

गंगाा हिमवर्तोमध्ये नदी पंच दशान्तेर
तैरभुक्ति रिति ख्यातो देश : परमपावन :”

डा. जयकान्त मिश्र History Of Literatuer मे सेहो लिखने छै ।
'It is today Known as 'Tirhut' or Mithila' but in the earlist known period of history it was called 'Videha' and included several kingdom in it. Mithila and Vaishali being the most important."

मिथिलाञ्चलक अतीत अत्यंत गौरवशाली महिमशाली आ भैवशालीक छैक से सर्वविदित अछि । जहाके माटी मुक्रिदायिनी एवं जीवन दायिनी छैक । नेपाली विद्धान सोमनाथ व्यासके कथानानुसार, मिथिला मेदिनी पुण्य जीवनमुक्ति प्रदायिनी कायामत मरणात मुक्ति तारको मंत्र सेवनार्थ । ”
मनु महाराजाक शब्दमे कुरुक्षेत्र च मत्याच्च पञ्चाल : सुरसेनक एवं ब्रहमर्षि ब्रहमावर्तावन्तर : मैथिली भाषाक महाकवि चन्दाझा “ गंगा बहथि जनिक दक्षिण दिशा पूर्व कौशिकी धारा । पश्चिम बहथि गंडकी उत्तर हिमवतवल विस्तारा ।”

सम्पूर्ण मिथिलाञ्चल पर्यटकीय दृष्टिकोणसँ महत्वपूर्ण छैक किएक त यहाँके नदीनाला, झरना अनवरत सुमधुर संगीत निनाद करैत प्रवाहित भइरहल छैक ।

यहाँके चिडै चुनमुन के मधुर आवाज, मिथिलाञ्चलक बाग, बगैचा, गल्ली कुचीमे गुंजित भरहल छैक । अनकोनेक पेड पौधा फल फूलके मनमोहक सौरभ एवं सुरमि सो सुवासित सुगंधचुतर्दिक वातावरणमे व्याप्त भऽ रहल छैक ।

सर्वप्रथम सुनसरी जिल्लाक सब धार्मीक क्षेत्र तथा कोशी टपु वन्यजन्तु आरक्ष, भेडेटार, सप्तकोशी नदी जेकाँ पर्यटकीय महत्वपूर्ण स्थलसभ समेतक एकीकृत विकास करबाक प्रयत्नक शुरुआत करवाकछैक  आ एकरा पैकेज टुर (Package Tour ) के लेल कार्यक्रम बनएबाक छैक । बराहक्षेत्र धरि पहुंचएवला सडकके पक्की बनएबाक छैक , रामधुनिआ बिष्णु पादुका जोडयवला सडक अबिलम्ब निर्माण करनाई आवश्यक छैक । धरान सं चौतारा धरि जायवला सडक पक्की बनाएब आ पुल पुलीया निर्माण कराएब जेकाँ कार्य शुरु करब । सुनसरी जिल्लाके कृषी उत्पादन तथा धार्मिक आ पर्यटकीय विकासक केन्द्रक रुपमे विकसित करब । बराहक्षेत्र, औलिया मठ, रामधुनी पिण्डेश्वर, बिष्णु पादुका जोडब धार्मिक पक्रपथ निर्माण करब तथा बराहक्षेत्र मे टेलिफोन टाबरक निर्माण करब कोशी टापु वन्यजन्तु आरक्षण मे एकही ठाओं मे ३ सय ५० जातिक चिडइ चुनमन्नी सब पाओल जाइछ ।

किछु हालहि सालमे २० गते कार्तिक सँ २७ गते कार्तिक धरि बराहक्षेत्रमे सम्पन्न महोत्सव एहि दिशामे पहिने सकारात्मक कदम कहल जा सकैत छैक । एकर उद्घाटन पूर्व प्र.म. गिरिजा प्रसाद कोइराला चतरा स्थित दुर्वासाघाटमे कैने रहथिन । हिन्दुजनकेँ प्रसिद्ध धर्मस्थल आ सुनसरी जिल्लाक अन्य पर्यटकीय क्षेत्रकेँ विश्व समक्ष लएबाक उदेश्य सँ जि.वि.स. सुनसरी ओहि महोत्सवक आयोजना कैने रहैक । बराहक्षेत्र महोत्सवक अवसरमे बराह पुराण, बिष्णुपुराण, वाचन, अनुष्ठान धार्मिक प्रवचन, साँस्कृतिक प्रदर्शनी, ओद्यौगिक तथा व्यापारिक प्रदर्शनी समेतक कार्यक्रम प्रभूति सम्पन्न भेल छलैक । एहि दु महला मन्दिरमे बारहकमुर्ति छैक । जकरा बिष्णुअवतार मानल जाइछ । एतय सँ दु मिल उज्जुर बराहक मन्दिर छैक । एकरा निकटमे चतराक बौद्ध स्तुप छैक । कोशी नदि किनारमे अवस्थित सप्तकोशी आ कोकहा नदी के संगम स्थल छैक । एतय बारहम शताब्दीक मन्दिर छैक । बराह क्षेत्रक मठ मन्दिर, माछ, मसल्ला, मुर्दाघाट तथा मधु प्रसिद्ध छैक । एतय प्रतिवर्ष कार्तिक मासमे बडका मेला जाहिमे देशक आ विदेशक पर्यटक तथा भक्तजन अबैत छथि ।

इतिहासविद् आ पुरातत्वविद् मोहन खनाल लिखैत छथि – “ तिरभुक्ति प्राचीन विदेह क्षेत्रैक नाम रहैक । जकरा सदानिरा वा गण्डकी नदि कोशल राज्य सँ पृथक कैने रहैक आ एकर राजधानी मिथिला रहैक । जे वर्तमान सिमरौनगढसं सम्बन्धित छैक । (मोहन खनाल, सिमरौनगढके इतिहास पृ.११) प्राचीन विदेहक राजधानी मिथिला रहैक त तिरहुत राज्यक राजधानी सिमरौनगढ रहैक । मोहन खनालक शब्दमे – “ पौराणिकह कालधरि विदेहक राजधानी मिथला रहैक । सदानीरा अर्थात् नारायणी नदी जाहि समय सँ कौशल आ विदेह राज्य अन्तर्गत तिरहुत आ एगारहम शताब्दी के प्रारम्भ सँ तिरहुत राज्यक राजधानी होयबाक सुअवसर सिमरौनगढ केँ प्राप्त भेलैक ।” (मोहन खनाल ः सिमरौनगढ इतिहास ः पृ. १०)

तैँ हेतु एतय कोशीसं गण्डकी धरिक भुभागमे पडएबला मिथिलाञ्चलक प्रसिद्ध पर्यटकीय स्थलसभक बारेमे संक्षेपमे सर्वेक्षण करवाक प्रयास करैत अछि ।

बराह क्षेत्र –

हिन्दुजनक पवित्र चरिटा तीर्थक्षेत्र मध्येक एकटा तीर्थ बराहक्षेत्रक धार्मिक महत्व सर्वविदित छैक । पवित्र धार्मिक स्थल बराह क्षेत्र पर्यटकीय विकासक लेल बृहत योजना तैयार करवाक काज भऽ रहल छैक । ई बृहत योजना एहि क्षेत्रक धार्मिक, सांस्कृतिक महत्वक संगहि विभिन्न जाति उपजाति आ सांस्कृतिक उत्थानक लेल तयार करैछ । बराहक्षेत्रके महेन्द्रराजमार्ग धरि जोडएबला सडक तथा धरान चतरा सडकके निर्माण कार्य के सेहो एही बृहत् योजनामे सम्मिलित कराओल जैतैक ।

कोशी वन्यजन्तु आरक्ष :
 एकर स्थापना सन् १९०६ मे भेल छैक । आ ई १७५ वर्ग किलोमिटर क्षेत्र मे फैलल छैक । पूर्वी नेपालक उदयपुर सप्तरी आ सुनसरी जिल्लामे एकर अवस्थिति छैक । एकर नामाकरण नेपालक सबसँ पैध नदी कोशीक नाओं मे कैल गैल छैक । एकर स्थापना २०२९ (१९७३) के राष्ट्रिय वन्यजन्तु  आरक्षक ऐन अनुसार भेल छैक । एकरा अन्तर्गत एहि सुरक्षित क्षेत्रमे जानवर सबके चरनाई सँ बञ्चित कैल गेल छैक । एतुक्का अर्ना भैंसा के सुरक्षाक लेल सेहो एहिमे प्रावधान कैल गेल छैक जकरा लेल ई क्षेत्र बड प्रसिद्ध । ई क्षेत्र संसार प्रसिद्ध पंक्षी सबक लेल प्रसिद्ध छैक । पंक्षि प्रेमी पर्यटक लोकनिक लेल ई स्थान बड लोकप्रिय मानल जाइछ । एहि क्षेत्रमे ३५० प्रकारक पंक्षीक जाति पाओल जाइछ । अक्टुबर सँ अप्रिल धरि एक सय तरहक पंक्षी सब एतय देखल जा सकै छै । संसारमे ने दुर्लभ भ गेल पंक्षी सब जेना कि उल्लु, काग, सारस, कौवा, परवा, बाज नीलकण्ठ, कठखोधी चिडई प्रभुति । तहिना अर्ना भैसा आ डलफिन आदि एतय सहजहि देखल जा सकैछ ।
एतय तरह तरहक माछक जाति जेना कि जनकपुर, महासीर आ गौंच पाओल जाइछ । एतय बडका बडका सांप सेहो पाओल जाइछ । एतय जयबाक लेल कोशी टप्पु वाइल्ड लाइफ कैम्प आ अक्वा वर्डस अन लिमिटेड कैम्प सँ आरक्षण कर ए सकैछ । एकर केन्द्रीय कार्यालय काठमान्डुमे अवस्थित छैक कोशी टप्पु पंक्षि प्रेमिक लेल स्वर्ग छैक । एतय प्रशिक्षण प्राप्त प्रकृति प्रेमी तथा पंक्षि विशेषज्ञ लोकनिक सेवा प्राप्त छैक । एतय असंख्यक तरहक गाछसब पाओल जाइछ जाहिपर चिडइगणक बास छैक । सफारी टेन्ट सब पैध छैक, सुसज्जित ओछाएन तथा कपडा फेरएवला कक्ष सब छैक । एतय बीस गोटें पर्यटक के बासु कए सकबाक व्यवस्था छैक । एतुक्का रम्सा रेस्टुरेन्ट बड प्रसिद्ध छैक जतय नेपाली आ विदेशी खेनाई पाओल जाइत छैक । मर्सा बार जतय नेपालीक संग संगहि आयातित शराब सेहो पाओल जाइत छैक ।
कोशी टप्पु वन्यजन्तु आरक्षण कैम्प एक्सपोर्ट नेपाल प्रा.लि.द्धारा संचालित छैक । ई. सन् १९९३ मे स्थापित भेल छैक । एतय १२ गोट टेन्ट छैक जतय २४ गोटें पर्यटक एक संग बसोबास करबाक व्यवस्था छैक । गोलघर शैली मे निर्मित बैम्बुबार (Bamboo Bar) मे नेपाली, चीनी आ पश्चिमी देशक खेनाई केँ सेहो स्वाद लेल जा सकै छ ।  एतय स्थानीय लोकसंस्कृति झलकयबला ढंगक कार्यक्रम सेहो नियमित रुपमे प्रदर्शित कैल जाइछ । एहि वन्य जन्तु आरक्षणमे स्थानीय व्यक्तिलोकनि केँ काज मे खटाओल जाइछ । जेना कि भनसिया भरिया आदि । एतय नौका बिहारक (Boating) के सेहो व्यवस्था छैक जे कि विदेशी पर्यटक लोकनिके आकर्षित करैत छैक ।

बिराटनगर
मिथिलाञ्चलक हृदयस्थल कहु कि प्रसिद्ध नगर अछि जे कि एकटा व्यापारिक तथा अद्यौगित नगर अछि । कहल जायछ जे ई राजा विराट पुरान राजधानी छैक । एतय एकटा मनोरञ्जन उद्यान –Recreation Centre) सेहो खोलने छैक जतए पर्यटकसब मनोरञ्जन एवं आमोदप्रमोदक लेल जायत छथि । वि.स. १९७६ मे मोरङ जिल्लाक सदरमुकामके विराटनगर नामाकरण कयल गेलैक । एकरा पहिने गुग्राह कहल जायत रहैक । एतुक्का प्रसिद्ध शक्ति पीठक नाम छैक काली मन्दिर । बिराटनगर बजारके मध्यभागमे अवस्थित सु प्रसिद्ध काली मन्दिर बिराटनगरक बनस्खण्डी महादेव मन्दिर जतेक प्राचीन नहियो होयत नेपालीलोकनि क हेतु प्रसिद्ध शक्तिपीठ छैक । जाहीमे स्थानीय व्यक्तिजनके असीम आस्था छैक , विश्वास छैक । ई मन्दिर एतुक्का बासी विभिन्न जाति, उपजाति, भाषाभाषी आ नेपाल भारतसब दिसक लोक जनकलेल अतिसय लोकप्रिय बनल छैक । एहि मन्दिरक स्थापक जनक मध्ये कृष्ण प्र. कोईराला प्रसिद्ध छथि । कालीक मूर्तिक काठ सँ समान्य घेरबारकय टिनके साधारण घरमे राखलगेल रहैन । अखन वोहिके पुर्ननिर्माण कयलगेल छैक । सो मशम्शेर बिराटनगर जुट मिलक खर्चमे शिखर शैलीक मन्दिरक निर्माणमे करवाकए एहिमे पृतक दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती, कुमार आ गणेश मूर्तिसब बनारस सँ आनिकए स्थापना कयल ।  ततपश्चात् ई मन्दिरक महिमा बड प्रचलित होयत गेलैक । आइकाल्हि हिन्दु सँस्कृति धर्मप्रति आस्थावान व्यक्ति ई मन्दिरके अपन आराधना आ पूजा अर्चनाक केन्द्र मानैत छथि ।  काली मन्दिरके स्थापना पूर्वहु बिराटनगरमे वनस्खण्डी महादेव आ सँसारीमाईस्थान जेका देवी देवताक मन्दिरसब छनि जतए भक्तजन दिनानुदिन पूजापाठ करएलेल जाइत छथि ।
एहि प्रकोर तेसर बेरमे निर्मित ई प्यागोडाशैली के मन्दिरक भितर प्रसिद्ध शक्तिपीठक रुपमे प्रतिस्थापीत मन्दिरमे शैलपुत्री, ब्रम्हचारिणी, चन्द्रघण्टा, कुष्माण्डा, स्कन्दमाता, कत्यायनी, कालरात्री, महागौरी आ सिद्धिदात्री नव दुर्गाक अतिरिक्त महाकाली, महालक्ष्म्मी, महासरस्वती, कुमार तथा गणेश आदिक पूजा अर्चना नियमित रुपले कयल जाइछ ।

धनुषाधाम
धनुषाधाम जिल्लाक सदरमुकाम जनकपुर सँ १४ मिल दुरस्थ स्थानमे धनुषाधाम अवस्थित छैक । पौराणीक कथनक अनुसार जनकपुरमे धनुष यज्ञ होयतकाल भगवान रामचन्द्रके धनुष तोडलापर एकटा खण्ड एतय खसल रहैक । तसर्थ एहि स्थानक नामाकरण धनुषाधाम भेल छैक । ई चुरीया पहाडक जडि मे स्थित छैक । प्रत्येक बर्ष माघ मासक रवीबारक दिन तथा १ गते एतय बडका मेला लगैत छैक । एतय स्थित पोखरीमे नहाकए शिव धनुषक खण्डित अंशक पूजा कैलजाइत छैक ।
जनकपुरधाम
धनुषा जिल्लाक सदरमुकाम जनकपुरमे माँ जगद्जननी जानकीक नौलक्खा मन्दिर अवस्थित छैन । कहल जाइत छैक जे भारतक मध्य प्रदेशक वृषभानु कुमारी नौलाख रुपैया खर्च कए एहि मन्दिर निर्माण करौने रहथिन । हुनकर मनोकामना जानकीजीक दर्शन कैलापर पूर्ण भेलाक कारणे ओ भक्तिभावपूर्वक एहि मन्दिरक निर्माण करौने छलिह । एहि मन्दिर के शीशमहल सेहो कहल जाइछ । एतय सीता स्वयंवर सेहो सम्पन्न भेल रहैक । तत्पश्चात् जगद्जननी सीता तथा मर्यादा पुरुषोत्तम रामक शुभ विवाह सेहो सम्पन्न भेल रहैन । प्रतिबर्ष रामनवमी तथा विवाह पंचमीक शुभ अवसरमे एतय बड पैघ मेला लगैछ । नेपाल आ भारतक अतिरिक्त विश्व के अनेकहु राष्ट्रक हिन्दुधर्मावलम्बी जन एतय एहि अवसरमे आबि कए जगद् जननी जानकीक दर्शन कए स्वयं कें कृत्य मानैत छथि ।
 “जनकपुरक महिमा एहि गीतमे गाओल गेल छैक ।
चलू जनकपुरधाम
जे छैक जनक जानकीक पावन गाम
मोक्षदायी अछि भूमि महान
अहिठाम अएला राम भगवान
अतिथि हमर प्राण समान ।”

Guest is our God मैथिल संस्कृतिक अभिन्न अंग छैक अतिथि देवो भव ।
एतुक्का दोसरो मन्दिर सेहो ओतबे महत्वपूर्ण आ धार्मिक दृष्टिकोण सश्ं पवित्र मानलजाइछ जकर नाम छैक राममन्दिर । एतय मर्यादा पुरुषोत्तम रामचन्द्रक मन्दिर छैन । एतय चारु भाई तथा जानकीक मूर्ति छैन । एहि परिसर मे हनुमानक मन्दिर सेहो छैन । एतय राजदेविक मन्दिरमे दुर्गा पूजाक अवसरमे बड धूमधाम संग दुर्गाक पूजा अर्चना कैल जाइत छैन । एहि मन्दिरक आगाँ धनुषसागर आ गंगासागर समान प्रसिद्ध पवित्र ताल छैक । पहिने लोक सब एहिमे नहाकए भगवान दर्शन करए जाइत रहथि मुदा एखन एकर पानी प्रदुषित भेलाक कारणे धर्मभिरु भक्तजन मात्र नहाएल करैत छथि । एहि सभक अतिरिक्त जनक मन्दिर, सुनयना मन्दिर, लक्ष्मण मन्दिर आ संकटमोचन आदि प्रसिद्ध देवी देवताक सेहो मन्दिर भेलाक कारणे एहि ठामकेँ जनकपुर धाम कहल जाइछ ।
जलेश्वर महादेव मन्दिर जलेश्वर नामक ठाओँ मे अवस्थित छैक । ई हिन्दु धर्मावलम्बिलोकनिक लेल एकटा प्रसिद्ध तीर्थ स्थल छैक । हिन्दुजनक पौराणिक ग्रन्थ पद्यपुराणमे एकर वर्णनपाओल जाइछ ।  गिर्वाण जुद्ध विक्रम शाहदेवके शासनकाल मे एहि मन्दिरक पूजा अर्चना तथा व्यावस्थापनक लेल ४०० विघा जमीन प्रदान कैल गेल रहैक । जलेश्वर मन्दिरक आगाँ तथा ओकरा पाछाँ वरुण सागर आ क्षिरेश्वर सागर अवस्थित छैक बड पवित्र मानल जाइछैक । एहि पोखरीमे स्नान कए श्रद्धालु भक्तजन जलेश्वर महादेवक दर्शन करैत छथि । रामनवमी तथा विवाह पंचमीक अवसरमे एतय बड पैघ धार्मिक मेला लगैत छैक । एहि मन्दिरमे जलकभीतर महादेवक शिवलिंग छैन ।
एहि मन्दिर पछाती महोत्तरी जिल्लाक सोनामाइक मन्दिर सेहो प्रसिद्ध छैक । एहि शक्तिपीठमे दुर्गापूजाक अवसरमे बड पैघ मेला लगैत छैक । एतय देवी केँ प्रसन्न करवाक लेल बलि प्रथा सेहो छैक ।

छिन्नमस्ता :
सप्तरी जिलामे अवस्थित राजदेवी आ छिन्नमस्ता देवीक मन्दिर सेहो बड प्रसिद्ध धार्मिक स्थलक रुपमे पूजित एवं सम्मानित मानल जाइत छैक । राजदेवीक मन्दिर एहि जिलाक सदरमुकाम राजविराजमे अवस्थित छैक त छिन्नमस्ता देवीक मन्दिर राजविराज सँ इकोस पूर्वमे सखडा गाविस मे स्थित छैक । एहि मन्दिरमे स्थित देवीक प्रसिद्ध  नेपालक अतिरिक्त भारतहुधरि पहुँचल छैक । ताहि हेतु भारतीय भक्तजनक लेल सेहो ई लोकप्रिय धार्मिक स्थल भ चुकल छैक । छिन्नमस्ता देवी के महत्व बड पैघ छैन । एतय भक्तजन क मनोकामना पूर्ण होमएक कारणे हिनकर प्रसिद्धि विशेष विशेष बढैत गेल छैन । एतय स्थित देवीक सिर छिन्न भेलाक कारणे हिनकर नाऔ छिन्नमस्ता भेल छैन । कहबी छैक कि मुगल शासकगण हिन्दुमठ मन्दिरमे स्थित देवी देवता गणक मूर्तिसभ तोडवाक अभियानमे हिनकहु लक्ष्य बनौने रहैन । गयासुद्दीन आ ओकर एहि मन्दिरक देवीक सिर कटने रहैन । विजातीय आ विधर्मी शासकजन के प्रकोपक कारणे एहन दुखद स्थिति भोगए पडवाक कारण सँ हिन्दु धर्मावलम्बि जनक चित्त उद्धेलित कठैत छैक । एतय सेहो बलिप्रथा होइत छैक मुदा एतय बलि चढौलाक पछाडी जमा भेल शोणित पर माछी नहि बैसैत छैक आ ने कपडामे दाग लगैत छैक । एहि देवीक महिमा तथा गरिमा अर्वणनीय छैन ।
मिथिलाञ्चलक देवघाट अपन बिशेष महत्व आओर महिमा अवर्णीय छैक । इ चितवन, तनहुँ आओर नवलपरासी जिलाके सीमामे कोनो न कोनो तरहै जुटल छैक । इहाँ तीनटा प्रमुख नदीसभक संगम भेलो के कारणे यी स्थान बड धार्मिक आओर पैध मानल जाइत छैक । एकर बड सुदीर्ध धार्मिक परम्परा मानल जाइत छैक । यी तीन नदी सभक नाम काली , गणडकी, त्रिशुली आओर नारायणी इ तीन नदीक संगम भेलाक कारणे एकरा नेपालके देवराज प्रयाग जैसन पवित्र आओर प्रसिद्ध मानल गेल छैक । इहाँ महेश सन्यास आश्रम, गलेश्वर बाबा समाधि, वेदविद्याश्रम, लक्ष्मी नारायण मंदिर, राम मंदिर, राधाकृष्ण मंदिर आदि प्रसिद्ध धार्मिक स्थल छैक । इहाँ माघ महिनाके १ गते अर्थात  माघ सँक्रान्तिमे बड पैघ मेला लागगेके पुरान परम्परा छैक । नेपाल आ पडोसी देश भारतके असंख्य धार्मिक पर्यटकसभ एइ अवसर पर आके एकर सोभा बढवैत छैक आओर धार्मिक पुण्य के भागी सेहो होयवाक अवसर प्राप्त करैत छैक ।
          सिरहा जिल्लाके अनेकानेक स्थलसभ पर्यटकीय दृष्टिकोण सँ बड महत्वपूर्ण छैक । जेना सलहेस गाथामे वर्णित छैक । “ खन खन रहैछी बेल्का पहाडमे खन रहैछी सरस बागमे, मानिक दहमे स्नान करैतमछी भगैछी त एही मालिनियाके खातिर, गढ पकरियामे मैयाके सुमिरैछी ।” सिरहा जिलामे सहलहेस गाथासँ सम्बन्धित पुरातात्विक एवं पर्यटकीय स्थल सभ छैक पकडिया गढ, महिसौधा, पतारी मानिक दह, लग राज सभामे श्री जयबद्र्धन रहथि विराजल एकर अतिरिक्त सलहेस फुलवारी,सांरस्वर नाथ महादेव मंदिर, सारसर, सिरहा जिलाक बनौलीगढ, सहलहेस, फुलवारीक मान्यता धार्मिक वनके रुपमे अछि बैशाख १ गते हरेक नया बर्षके उपलक्ष्यमे इहाँ पैध मेला लगैत छैक  आओर यई मेलामे जिलाक पर्यटकीय दृष्टिकोण सँ बड पैध महत्व छैक । भारत आओर नेपालके असंख्य सहभागी होइत छैक । तसर्थ सिरहा सर्लाही जिलामे स्थित रजवा शिवालय सेहो बड प्रसिद्ध ऐतिहासिक आ धार्मिक स्थलक रुपमे बहुत प्रसिद्ध छैक । सदरमुकाम मलंगवा सँ १० मिल दुरस्थ स्थित ई शिवालय फरहदवा गाविस मे स्थित छैक । एकर शाब्दिक अर्थ छैक राजाक शिवालय ।  कहल जाइछ जे पूर्व प्रधानमन्त्री जंग बहादुर ओहि क्षेत्रमे शिकार खेलए गेल छलाह । आ ओतहि विमार भ कए हुनकर मृत्यू भ गेलैन । हुनका नाओ पर शिवालयक स्थपना भेल रहैक । एखन ओ उपेक्षित ठाओँ जेकाँ भ चुकल छैक ।
    सदरमुकाम मलंगवामे से हो ठीक शहरक बीचो बीच दुर्गास्थान जकर दर्शन कए परिक्रमा कैला पर लोकक मनोकामना पुर्ण होयत छैक । सर्लाही जिलाक हरिपुर गामक निकट चितायन मेला लगैत छैक  जतय प्रतिवर्ष बहुसंख्यक लोक मेलामे अबैत छथि । माघ मासक माघ संक्रान्ति दिन एतय पैघ मेला लगैत छैक । हनुमान नगर छपकैँयामे एकटा प्रसिद्ध शिवालय स्थित छैक । ई एखन उच्चविद्यालयक परिसरमे भेलाक कारणे एतय दुर्गा पूजाक अवसरमे तथा शिवरात्रीक शुभ अवसरमे बड पैघ मेला लगैत छैक जतए लग लगाइतक शिवभक्त जनक दर्शनार्थ लागल भीर स्मरणीय होइछ । सिसौटिया गाविसमे देवी महारानीक नैसर्गिक स्थान सेहो प्रसिद्ध छैक । एतय खुब पैघ बडगाछक जडिमे देवी महारानीक स्थान छैन । जतय भक्तजन भोरे साँझ दर्शनार्थ अबैत छथि । एकरा लगहिमे एकटा बडका मोनी (पोखरी)  सेहो छैक जतय कमल कफूल फूलयलापर ओ स्थान दर्शनीय भए जाइत छैक ।
रौतहट जिलाक शिवनगरक शिवालय बड प्रसिद्ध छैक । जतय शिवरात्रीक अवसरमे शिवभक्त लोकनि काँवर ढोऐत अबैत छथि आ भगवान शिवके अपन शक्तिक अनुसार प्रसाद चढुँवैत छथिन आर आशिर्वाद प्राप्त करैत छथि । एतय किछु भक्तजन दंड प्रमाण दैत सेहो  अबैत छथि जे कि बड कष्ट प्रद होइत छैक । अपन मनकामना पूर्ण भेलापर  भक्तजन एहि कष्ट क रुपमे नहि लैत छथि । रौतहट मे अवस्थित नूनहर पहाडक प्राकृतिक दृश्य एहन नयनाभिराम छैक जे शब्दमे वर्णन करब साध्य नहि । ई एकटा प्रसिद्ध पर्यटकीय स्थान छैक । एतय लोकसभ पिकनिक (बनभोज) मनाबए आएल करैत छथि । एतुक्का समीपमे स्थित शिवालयमे दर्शन सेहो करैत छथि । पर्यटकके दृष्टिकोण सँ एकर बड महत्वपूर्ण स्थान छैक ।

मूर्तिया :
ई स्थान बेसी ऐतिहासिक भेलासँ एकर महत्व सेहो बेसी छैक । कर्णटबंशीय राजालोकनिक राजधानी सिमरौनगढ सँ एकर सम्बन्ध छैक । एतय पुरातात्वविभाग के उत्खनन करैत काल बहुसंख्यक मूर्ति प्राप्त भेलासँ एकर नाम हि मूर्तिया पडिगेल छैक । एखन एकरा सुरक्षित स्थानक रुपमे राखल गेल छैक । एतहु एकटा पैघ शिवालय भेला से स्थानीय लोकजन दर्शन करए प्रतिदिन जाइत छथि आ माघ १ गते एतहु पैघ मेला लगैत छैक । एखन एकर महत्व बेसी बढि गेल छैक किएक त सर्लाही जिलाके सबसं बडका बजार बरहथवाक समीप एकर अवस्थित छैक । एतय लोक सभक आबत जाबत बड होए लागल छैक । एतय एकटा हाइ स्कूल आ बोर्डिङ स्कूल तथा प्रहरी चौकी सेहो छैक । राजनितिक पीडित सभक लेल एतय बसोबास के नीक व्यवस्था कैल गेल छैक ।
मोहन खनालक शब्दमे ः मंदीरके सामने अर्थात् पश्चिमदिश जमिन स लगभग ३ मीटर गहिर स्थान छैक । एहि स्थानमे शिवलिंग सहित छोट मंदीरक भगवानशेष देखाइत छैक ।(मोहन खनाल ः सिमरौनगढको इतिहास पृष्ठ ९१ )
गढीमाईक मंदीर बारा जिलाक बरियारपुर गाममे अवस्थित भेला सं नोपल तराई प्रदेशक बसें पैघ शक्ति पीठक रुपमे चर्चित भेल छैक । एतय एशिया महादेश के ने सबसें पैघ मेला लगैत छैक तथा एतय सबसँ बेसी बली चढबाक प्रथा सेहो एखनहु जीवित छैक । एतय प्रत्येक पांच बर्ष मे बडका मेला लगैत छैक । जाहिमे नेपाल आ भारतक भक्तजन सभ श्रद्धा भक्तिपूर्वक गढीमाइक दर्शन करवाकलेल अबैत छथि । एतयके स्थित मंदीरमे मानता कैल अवश्य पूर्ण होइछ से अटुट विश्वास छैक । अतएव दिनदिने एहिठामक महत्व बढैत जाइत हमरा सभ पबैत छी ।

सिमरौनगढ :
ई एकटा बड महत्वपूर्ण ऐतिहासिक ठाम छैक । कर्णट वंश आ डोयवंशक शासन एतय रहैक । सम्पूर्ण मिथिलाञ्चलक ई राजधानी रहैक । एखनहु राजदरबारक अबशेष एतय देखए सकैछ । एतय चारुकात बाग बगिचा, पोखरिआ किला रहैक । किलासभक चिन्ह स्पष्ट रुपमे देखाइत छैक । एकर क्षेत्रफल २८ वर्ग मिल रहैक । रनिवास राजाक निवास एखनहु दर्शनीय छैक । एकरा परिसर भीतर जंगबहादुर बेटा जंग रामचन्द्र भगवानक मंदीर बना कए एकटा प्रशंसनीय काज कैने छथि । एतय एकटा बड प्रसिद्ध कंकाली माईक मंदीर सेहो छैक । एतय रामनवमीक अवसरमे पैघ मेला लगैत छैक । राजा सवाई सिंहक काल मे २०८ पोखरी आ २०८ इनार रहैक । एखनहु रनिवासक लगक पोखरी प्रमाणक रुपमे विद्यमान छैक । एहि पोखरीमे रानी आ राजपरिवारक अन्य सदस्यगण स्नान करैत रहथि । एहिमे फूलाएल फूल देवतालोकनि कें चढवैत रहथि । सिमरौनगढ अपनामे एकटा स्वर्णिय इतिहास कायम राखि कए आइ से हो दर्शनीय बनल अछि ।
ई एखन एकटा गामक रुपमे परिणत भेल छैक । जतय एकटा छोट बजार सेहो लगैत छैक । एतुक्का प्राप्त मूर्तिसभ पुरातत्व विभाग सुरक्षित रखने छैक । एतय सं अनेकहु बहुमुल्य मूर्ति सब हेरा गेल छैक जे कि अति दुःखद बात छैक ।

कमलामाई स्थान :
ई सिन्धुली जिलाक सबसँ महत्वपूर्ण धार्मिक स्थान छैक । ई कमलानदी आ गंगा नदीक संगम स्थलमे अवस्थित भेलाक कारणे एकर धार्मिक महत्व अधिकहि बढि गेल छैक । समुद्रक सतह सं २००० फी.(६१०) मीटर उचाईमे स्थित ई धार्मिक स्थल प्रकृतिक कोडमे अवस्थित भेलासँ एकर प्रकृतिक सौन्दर्य सेहो अत्यधिक मनोरम छैक । सिन्धुलीक सदरमुकाम सँ ९९ कि.मी. दुरस्थ ई स्थित छैक ।
माघ मासक १ गते दिन एतय पैघ मेला लगैत छैक । एहि पवित्र दिनमे हजारहु हिन्दुलोकनि एतय पूजा अर्चना करए अबैत छथि आ रातिभरि नाचगान करैत रमनचमन करैत छथि । एतय बलिदेबाक प्रथा सेहो भेलाक कारणें भक्त लोकनि मुर्गा, परवा आ खसीक बलि पैदान कए कमलामाई कें प्रसन्न करवाक प्रयत्न करैत छथि । एहि जिलामे एहिकें अतिरिक्त गाविसमे वडा नं. २ मे अवस्थित मधुगंगा महादेव स्थान सेहो पर्यटकीय दृष्टिकोण सँ महत्वपूर्ण मानल जाइत छैक । ई मंदीर गुफाक भीतर मेलाक कारणें वि.स. २०३६ सालमे एहि महादेवक पत्ता लागल रहैन । एहि महादेवस्थानक नाम कोना राखल गेलैनत ई सन्दर्भमे गुफा अति विकट आ अन्कन्टार जंगलक भीतर भेलासँ ताहि जंगलमे पशुपंक्षि मधुर स्वर आ झरना जेकाँ तथा गुफाके निकट पानी झरैत स्वच्छ नील दह होइत बहैत कमल फूलाएल एहि गुफाक नाम मधुगंगा राखल गेलै किवंदन्ती सुनबामे अबैछ । एहि गुफामे नेपालक तराईके जिला तथा भारत विहारक हिन्दु धर्मावलम्बीसभ दर्शन करए अबैत रहैत छथि ।
वीरगंज शहरक सभसं बेसी व्यस्त मध्य भागमे गहवामाईक मंदीर बड प्रसिद्ध छैन । एतय भोरे सांझ श्रद्धालु भक्तजन लोकनिक भीड विराट रुपमे देखलजा सकैछ । दुर्गा पूजाक अवसरमे एतय अत्यधिक भीड भेलासँ भक्तजनकें धैर्यक अन्तिम क्षण धरि प्रतिक्षा करए पडैत छैन । ई  गहवामाइक मंदीरमे मानवाकार दुर्गाक प्रतिमा राखल छैन मुदा एतय मां दुर्गाक सातहुबहिनि क सुन्दर प्रतिमा एकटा लम्बा पाथरमे अंकित कैल गेल छैन । जाहि सं ई नेपाल तराईक एकटा पैघ शक्तिपीठक रुपमे पुजित होइत छथि । मंदीरक आकार छोट होइतहु ई मंदीरक ई मंदीरक प्रसिद्धी पैघ छैक आ एकरा भीतर अनेकहु देवी देवताजनक प्रतिमा स्थापीत कैल गेल छैन ।
गण्डकी नदीके किनारमे अवस्थित त्रिवेणी आओर बाल्मीकी आश्रम सेहो परमपावन एवं दर्शनीय धार्मिक स्थल छैक । बाल्मीकी आश्रममे संस्कृतक आदिकवी वाल्मीकि अपन रामायण लिखने छलाह जे संसार प्रसिद्ध रचना छैक । त्रिवेणीमे प्रतिवर्ष बड पैघ मेला लगैत छैक ।

सन्दर्भग्रन्थ सूची :
१.Diwakar, R.R. विहार थ्रु द एजेज : ओरियन्ट लौगंमैन्स : १९५८
२. मोहन प्रसाद खनाल : सिमरौनगढको इतिहास : नेपाल र एशियाली अनुसन्धान केन्द्र त्रि.वि. काठमान्डौ, प्रथम संस्करण ०५६
३. मोहन खनाल : पश्चिम नेपालका मूर्ति र स्थापत्य : नेपाल एशियाली केन्द्र २०५५
४. रामदयाल राकेश : कल्चरल हेरिटेज अफ नेपाल तराई ः निराला पब्लिकेशनस, नयां दिल्ली १९९४
५. राम दयाल राकेश : मैथिली संस्कृति : ने.रा.प्र.प्र.सं २०५६
६. राम दयाल राकेश : पिल ग्रिमेज टुरीज्म इन नेपाल : सफारी नेपाल प्र.सं. २००३
७. सोमनाथ एण्ड आशाधर : नेपाल लैण्डअफ गौडस गौडसेस एण्ड डेमान्स : मखाह पब्लिकेशन, नइदिल्ली
८. बाल्मिकी रामायण : गीता प्रेस गोरखपुर । २०९७ : १९८५
९. लालदास : रामविहारी : मिथिला दर्पण, दरभंगा : १९१५

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